गुरुवार, 26 जून 2025

छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ का विस्तार करने के लिए, विधान में उल्लिखित जानकारी के आधार पर निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं: प्रदेश अध्यक्ष रवि गढ़वाल

छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ का विस्तार करने के लिए, विधान में उल्लिखित जानकारी के आधार पर निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं: प्रदेश अध्यक्ष रवि गढ़वाल
1. संगठनात्मक विस्तार:
 * क्षेत्रीय इकाइयों का गठन: संघ अपने कार्य को सुगमतापूर्वक करने हेतु संभाग, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर इकाइयों का गठन कर सकता है. प्रत्येक संभाग, जिला एवं ब्लॉक में एक-एक अध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत स्तर पर एक-एक कार्यकारणी सदस्य (मजदूर सेवक मित्र) नियुक्त किए जाएंगे.
 * केन्द्रीय बॉडी का बहुमत: इन क्षेत्रीय इकाइयों का गठन केन्द्रीय बॉडी के बहुमत के आधार पर होगा.
 * बैंक खाते और निधि वितरण: संघ का केवल एक ही बैंक खाता होगा, जिसमें प्राप्त राशि का 50% संभाग, जिला, ब्लॉक में और 50% केन्द्रीय बॉडी के पास रहेगा.
 * लेखा-जोखा और ऑडिट: संभाग, जिला व ब्लॉक इकाइयां अपने लेखा-जोखा का ऑडिट करवाकर केन्द्रीय बॉडी के पास प्रस्तुत करेंगी, जिसके आधार पर केन्द्रीय बॉडी पंजीयक कार्यालय को नियमानुसार प्रस्तुत करेगा.
 * शिकायतों का निपटारा: समस्त शिकायतों का निपटारा विधानानुसार केन्द्रीय बॉडी करेगा.
2. सदस्यता विस्तार:
 * पात्रता: छत्तीसगढ़ के भवन निर्माण कार्य करने वाले श्रमिक, जो संस्था के नियम व उप-नियम मान्य करते हैं, सदस्यता शुल्क देकर संघ के सदस्य बन सकते हैं.
 * सम्माननीय सदस्यता: जो व्यक्ति साधारण सदस्य होने की पात्रता नहीं रखते, उन्हें सम्माननीय सदस्य के रूप में प्रवेश दिया जा सकता है. ऐसे सदस्य प्रबन्धकारिणी समिति में भी चुने जा सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या व्यावसायिक संघ अधिनियम की धारा 22 के अनुसार कुल सदस्यों के आधे से अधिक नहीं होगी.
 * सदस्यता शुल्क: प्रवेश शुल्क 10/- रुपये और मासिक सदस्यता शुल्क 20/- रुपये प्रति सदस्य होगा. यह शुल्क मासिक, त्रैमासिक, छमाही या वार्षिक रूप से लिया जा सकता है.
 * सदस्यों को लाभ का अधिकार: सदस्य कम से कम पांच माह तक संघ के सदस्य रहने और पूर्ण चंदा चुकाने पर संघ द्वारा दिए गए लाभ प्राप्त करने के अधिकारी होंगे.
 * अनुशासन और अर्थदंड: कार्यस्थल पर शराब पीकर कार्य करने या बाल मजदूरी कराने पर संबंधित विभाग को अवगत कराते हुए उचित कार्यवाही की मांग की जाएगी, साथ ही संघ द्वारा उचित अर्थदंड (जुर्माना) एवं संघ की सदस्यता समाप्त किए जाने की व्यवस्था की जाएगी. मासिक चंदा न देने पर सदस्यता समाप्त हो सकती है, लेकिन शेष चंदा और पुनः प्रवेश शुल्क देने पर सदस्यता जारी रखी जा सकती है.
3. उद्देश्यों की पूर्ति और कल्याणकारी गतिविधियाँ:
 * श्रमिकों को संगठित करना: छत्तीसगढ़ के भवन निर्माण श्रमिकों को संगठित करना और सेवायोजकों के साथ उनके आपसी संबंध नियमानुसार रहें, ऐसी व्यवस्था करना.
 * नौकरी और जीवनयापन की स्थिति में सुधार: सदस्यों के लिए नौकरी और जीवनयापन की स्थिति सुधारना.
 * कठिनाइयों का निवारण: सदस्यों की कठिनाइयों का निवारण करने का प्रयत्न करना.
 * पारिश्रमिक की व्यवस्था: पारिश्रमिक की कमी को रोकना और संभवतः अग्रिम रूप में दिलाने की समयानुसार व्यवस्था करना.
 * विवादों का सौहार्द्रपूर्ण समाधान: सेवायोजक व सेवायुक्त के बीच उत्पन्न विवादों के काल में काम के अवरोध को टालना और सौहार्द्र से आपसी हल निकालने का प्रयत्न करना.
 * सहायता प्रदान करना: बीमार, बेकारी, निर्बलता, वृद्धावस्था तथा मृत्यु के समय सदस्यों के लिए सहायता प्राप्त करना. दुर्घटना के समय सदस्यों के लिए क्षतिपूर्ति प्राप्त करना. तालाबन्दी या हड़ताल (जो संघ की स्वीकृति द्वारा की गयी हो) के समय सदस्यों को सहायता दिलाना.
 * वैधानिक सहायता: नौकरी या उससे संबंधित प्रकरणों से सदस्यों को वैधानिक सहायता देना. औद्योगिक विवादों में श्रमिक का प्रतिनिधित्व करना.
 * शिक्षा और प्रशिक्षण: मजदूरों एवं उनके आश्रितों के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना तथा मजदूरों को उनके कौशल को बेहतर बनाने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में उनकी मदद करना.
 * जागरूकता और सरकारी योजनाओं का लाभ: श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर शिक्षा, न्याय, कानूनी सहायता दिलाना एवं स्वास्थ्य लाभ के अलावा श्रमिक सदस्यों का श्रम मंडल में पंजीयन एवं सरकार (शासन) के विभिन्न योजनाओं में आवेदन करने में सहायता प्रदान करना एवं अधिक से अधिक हित लाभ दिलाने का प्रयास करना.
 * सामाजिक, आर्थिक, पारस्परिक तथा राजनैतिक जीवन में सुधार: सदस्यों के सामाजिक, आर्थिक, पारस्परिक तथा राजनैतिक जीवन में सुधार करने का प्रयत्न करना.
 * श्रम संगठनों से सहकार्य: उन श्रम संगठनों से, जिनके उद्देश्य संस्था के सदृश हों, के साथ सहकार्य करना तथा संस्था को उनसे संबद्ध करना.
4. वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही:
 * सामान्य निधि का उपयोग: व्यावसायिक संघ विधान सन् 1926 की धारा 15 के अनुसार सामान्य निधि का उपयोग संघ के पदाधिकारियों के वेतन, भत्ता, संचालन व्यय, वैधानिक कार्यवाही, औद्योगिक विवादों में सहायता, सदस्यों की हानि की क्षतिपूर्ति, बीमारी, दुर्घटना, बेकारी, वृद्धावस्था, मृत्यु के समय सहायता, जीवन-बीमा, शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक लाभों की व्यवस्था, नियतकालिक-पत्रों का प्रकाशन, शासन द्वारा राजपत्र में विज्ञप्ति किसी अन्य उद्दिष्ट के हेतु और कार्यकारिणी सदस्य को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए किया जा सकता है.
 * कोष सुरक्षित रखने की व्यवस्था: सदस्यों से प्राप्त चंदा, दान आदि से प्राप्त कुल निधि को संघ की सामान्य निधि में समावेश होगा. यह धनराशि प्रबंधकारिणी समिति द्वारा अनुमोदित बैंक या बैंकों में संघ के नाम से जमा की जाएगी, जिसका व्यवहार प्रदेश कोषाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश महामंत्री या नामित में से कोई दो व्यक्ति करेंगे. प्रदेश महामंत्री अथवा प्रदेश कोषाध्यक्ष अपने पास हाथ खर्च के लिए 50,000 रुपये से अधिक निधि नहीं रख सकेंगे.
 * वार्षिक हिसाब परीक्षण: संघ योग्य ऑडिटरों द्वारा वार्षिक हिसाब का परीक्षण करवाएगा, जिन्हें प्रबंधकारिणी समिति ने व्यावसायिक संघ अधिनियम के अधीन बने छ.ग. ट्रेड यूनियन रेग्युलेशन्स, सन् 1961 के रेग्युलेशन्स क्रमांक 18 के अनुसार नियुक्त किया हो. वार्षिक विवरण-पत्र प्रतिवर्ष 31 मार्च के पूर्व पंजीयक व्यावसायिक संघ को भेजा जाएगा.
 * हिसाब की पुस्तकों का निरीक्षण: संघ के हिसाब की पुस्तकें किसी भी सदस्य या पदाधिकारी के निरीक्षण हेतु प्रधान कार्यालय में छुट्टियों के दिन छोड़कर कार्यालय के कार्यकाल में उपलब्ध रहेंगी.
5. कानूनी और प्रशासनिक अनुपालन:
 * विधान में परिवर्तन: विधान में कोई भी संशोधन, परिवर्तन या घट-बढ़ साधारण सभा में संस्था में प्रविष्ट कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से किया जा सकता है, जबकि किए जाने वाले परिवर्तन की सूचना सदस्यों को कम से कम सात दिन पूर्व दी गई हो. व्यावसायिक संघ अधिनियम, 1926 के अंतर्गत रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेड यूनियंस द्वारा समय-समय पर सुझाए गए संशोधन या परिवर्तन अविलम्ब किए जाएंगे.
 * हड़ताल की मंजूरी: संघ अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जब तक संराधन एवं पंच निर्णय के मार्ग उपलब्ध हैं, तब तक हड़ताल के लिए मंजूरी नहीं देगा. वह तब तक हड़ताल नहीं करेगा जब तक कि हड़ताल के लिए मतदान न लिया गया हो और अधिकांश सदस्यों ने हड़ताल के पक्ष में मत न दिया हो.

           इन सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करके छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ अपने उद्देश्यों को पूरा करने और अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सक्षम होगा.