रविवार, 3 मार्च 2024
छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ का उद्देश्य
-: उद्देश्य :-
2. (अ) इस संस्था के उद्देश्य निम्नाकिंत है-
1. छत्तीसगढ़ राज्य के भवन एवं अन्य निर्माण क्षेत्रों में व्यवसाय/उद्योग में काम करने वाले विभिन्न निर्माणी कर्मकार सम्बंधित कार्य प्रकृति/ प्रवर्ग में कार्य करने वाले श्रमिको को संघ में सदस्यता दिलाकर संगठित व एक सूत्र में करना एवं सेवा योजक के साथ उनके आपसी संबंध नियमानुकुल रहें, ऐसी व्यवस्था करना।
2. संघ के सदस्यों के लिये नौकरी तथा जीवन यापन की स्थिति सुधार करना, जिसके अंतर्गत संघ के सदस्यों/श्रमिको और नियोक्ताओं को किसी माध्यम से संपर्क कराया जा सके ऐसा व्यवस्था करना तथा बेहतर रोजगार के अवसर दिलाने का प्रयास करना।
3. शिक्षित एवं अशिक्षित बेरोजगारों, संघ के सदस्यों एवं उनके आश्रितों/परिवार के सदस्यों को उनके योग्यता के अनुसार रोजगार तथा स्वरोजगार दिलाने तथा उनके कार्य के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण दिलाने का प्रयास करना।
4. श्रमिक सदस्य एवं श्रमिक के बच्चो/ युवाओं को बेहतर रोजगार के लिए मार्गदर्शन करना, तथा शिक्षण संस्थान एवं कौशल प्रशिक्षण संस्थान खोलना।
5. श्रमिकों/कर्मचारियों तथा संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वाले समस्त कर्मकारों के अधिकारों के लिए कार्य करना तथा उनको क़ानूनी सहायता, शिक्षा और जागरूकता प्रदान करना। उनकी कठीनाईयों का निवारण करने का प्रयत्न करना।
6. पारिश्रमिक की कमी को रोकना और सम्भवतः अग्रिम रूप में दिलाने की समयानुसार व्यवस्था करना।
7. कुशल और अकुशल श्रमिको के पारिश्रमिक का पूर्ण भुगतान नियोक्ता को करने बाध्य अथवा अनुरोध करना एवं आवश्यक हो तो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत श्रम विभाग तथा श्रम न्यायालय के माध्यम से मजदूरी का भुगतान दिलाने का प्रयास एवं मार्गदर्शन करना।
8. श्रमिक सदस्यों को काम के दौरान बाल मजदूरी (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन करने से रोकना । साथ ही 14 वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को किसी कारखाने या खान एवं विभिन्न प्रतिष्ठानों में काम में नहीं लगाया जाना हैं। अथवा अन्य किसी जोखिमपूर्ण रोजगार में नियुक्त नहीं किया जाना है। ऐसा करते पाए जाने पर संघ की सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। सम्बंधित विभाग को अवगत कराते हुए उचित कार्यवाही हेतु मांग भी की जाएगी।
9. श्रमिक सदस्यों को अनुशासन में रहकर कार्य करने तथा शराब पीकर कार्य न कर सके इसके लिए संघ द्वारा उचित अर्थदंड (जुर्माना) एवं संघ की सदस्यता समाप्त कर देने जैसा व्यवस्था करना।
10. संघ के विस्तार एवं श्रमिको को संघ में सदस्यता दिलाने, श्रमिको को संगठित करने, श्रमिक सदस्यों एवं उनके बच्चों को जागरूक कर शिक्षा, न्याय एवं स्वास्थ्य लाभ के अलावा श्रम मंडल में पंजीयन, सरकार (शासन) के विभिन्न योजनाओं में आवेदन करने में सहायता प्रदान करने, उन्हें हितलाभ दिलाने में उनका सहायता करने, विभिन्न सुविधा प्रदान करने एवं मजदूर हित में कार्य करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक जिले में जिला इकाई के जिला समिति के प्रस्ताव एवं अनुसंशा पर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक जिले के ब्लाक में ब्लाक अध्यक्ष/ प्रवर्ग ब्लाक अध्यक्ष, एवं प्रत्येक ग्राम पंचायत व नगरीय निकाय स्तर पर कार्यकारणी सदस्य (कार्यकर्ता) को अथवा पृथक से मजदूर सेवक मित्र (एमएसएम) एवं सेक्टर मजदूर सेवक मित्र (एस एमएसएम) का पद/दायित्व पर मनोनीत/नियुक्ति किया जा सकेगा। जिन्हें उनके उपरोक्त कार्यक्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर सामान्य निधि से उचित प्रोत्साहन राशी ब्लाक अध्यक्ष/ प्रवर्ग ब्लाक अध्यक्ष को छोड़कर प्रदान किया जा सकेगा।
11. श्रमिक सदस्यों के सहायता और सुविधा के लिए भवन और सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम 1996 का धारा 12 (1) के अधीन किसी भी श्रमिक सदस्यों का श्रम मण्डल में हिताधिकारी के रूप में पंजीयन एवं विभिन्न योजनाओं में आवेदन करने हेतु नियोजन प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी तो उनकी सहायता और सुविधा हेतु छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तो का विनयमन) नियम 2008 के नियम 272 (ख) (एक) के तहत यह संघ नियोजन प्रमाण पत्र जारी कर संघ के सदस्यों को संघ के प्रदेश इकाई द्वारा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री व संभाग इकाई द्वारा संभागीय अध्यक्ष एवं जिला इकाई द्वारा जिला अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष की अनुपस्थिति में जिला उपाध्यक्ष अथवा जिला महामंत्री को अपने अपने क्षेत्राधिकार के श्रमिकों को देने की पात्रता रहेगी।
12. सेवायोजक व सेवायुक्त के बिच उत्पन्न विवादों के काल में काम के अवरोध को टालना और सौहाद्र से आपसी हल निकालने का प्रयत्न करना।
13. बिमार बेकारी निर्बलता वृद्धावस्था तथा मृत्यु के समय सदस्यों के लिए सहायता प्राप्त करना।
14. दुघर्टना के समय सदस्यों के लिये क्षतिपूर्ति (विधान के अधिन क्षतिपूर्ति) प्राप्त करना ।
15.नौकरी या उससे संबंधित प्रकरणों से सदस्यों को वैधानिक सहायता देना।
16. तालाबन्दी या हड़ताल जो संस्था की स्वीकृति द्वारा की गई हो के समय सदस्यों को सहायता दिलाने का प्रयत्न करना ।
17. छत्तीसगढ़ जनता निर्माणी मजदूर कर्मकार संघ पंजीयन क्रमांक 560 एवं उन अन्य श्रम संगठनों तथा एन.जी.ओ. जिनके उद्देश्य संस्था के सदृश हों के साथ सहकार्य करना तथा संस्था को उनके संबद्ध करना।
18. व्यवसायिक संघ विधान के निहित निति के अनुसार श्रमिक वर्ग की सहायता करना।
19. साधारणतः सदस्यों के समाजिक आर्थिक पारस्परिक तथा राजनैतिक जीवन में सुधार करने का प्रयत्न करना,
20. औद्योगिक विवादों में श्रमिक का प्रतिनिधत्व करना एवं श्रमिको को सप्ताह में कम से कम एक दिवस का अवकाश रखने का अधिकार दिलाना।
21. श्रमिक सदस्यों को उनके कार्य के प्रकृति/प्रवर्ग तथा कार्य व्यवसाय के अनुसार संगठित रहने तथा अपने लीडर/अध्यक्ष/प्रवर्ग ब्लाक अध्यक्ष चुनने का अधिकार प्रदान करना।
22. श्रमिक सदस्यों के सुविधा हेतु श्रम मंडल में पंजीयन एवं शासन के विभिन्न योजना का ऑनलाइन सरलता से हो सके इस हेतु श्रम मंडल से निः शुल्क अथवा श्रमिक सहायता शिविर का आयोजन कर, श्रमिक का सदस्यता एवं संघ के जिला समिति द्वारा अनुबंधित/प्रस्तावित कामन सर्विस सेंटर/ च्वाइस सेंटर ऑपरेटर नियुक्त कर सहायता प्रदान किया जा सकेगा। जिसका निर्धारित सेवा शुल्क का भुगतान श्रमिक सदस्य स्वयं करेंगे, इसका भुगतान सामान्य निधि से नहीं किया जायेगा।
23. संघ में सदस्यता उपरांत निर्माणी श्रमिक,संघ के पदाधिकारी,संघ के कर्मचारी को अपने कार्य को पहचान देने के उद्देश्य से यदि परिचय पत्र की आवश्यकता हो तो निर्धारित शुल्क पृथक से जमा कर प्रदेश अध्यक्ष अथवा सम्बंधित जिला के जिला अध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित पहचान पत्र प्राप्त कर सकेगा।
24. संघ द्वारा छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं एवं जरुरत मंदों को विभिन्न प्रकार के रोजगार दिलाने के लिए विभिन्न शासकीय/अशासकीय संस्थानो/प्रतिष्ठानों/ कार्यालयों के कार्यालय प्रमुखों एवं बेरोजगारों के मध्य संपर्क स्थापित कराने के उद्देश्य से एक प्लेसमेंट एजेंसी बनाया जायेगा। जिसमे अनुबंध कर उक्त कार्यालयों में कर्मचारी मुहैया कराया जा सकेगा। इसका प्रधान कार्यालय खोला जायेगा, एवं प्रत्येक जिलो में रोजगार सेवा केंद्र खोला जायेगा, जिसे प्रदेश इकाई एवं जिला स्तर पर जिला इकाई द्वारा संचालित किया जायेगा, इसके लिए पृथक से प्रबंधकारिणी समिति द्वारा प्रस्ताव कर नियम/विनियम बनाया एवं संसोधन किया जा सकेगा। प्रबंधकारिणी समिति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।

