गुरुवार, 9 मई 2024

छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ आदर्श विधान में उद्देश्य

                                                



       छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ     

                                                पंजीयन क्रमांक  -  116466 , पंजीयन तिथि - 22/04/2024                                                          

आदर्श विधान 

1. नाम एवं पताः-छत्तीसगढ़ मजदूर शक्ति संघ होगा। जिसे संक्षेपाक्षर में (CGMSS) के नाम से भी जाना जायेगा।  और इसे विधान में संघ के नाम से सम्बोधित किया जायेगा।

पता :-श्री संतोश मिश्रा, निवास स्थान मु. तुलसी आवास राजकिशोर नगर पोस्ट बिलासपुर जिला बिलासपुर छ.ग.। 

कार्यक्षेत्र - संम्पूर्ण छत्तीसगढ़ 

उद्देश्य


2.   (अ) इस संस्था के उद्देश्य  निम्नांकित होंगेः-


1.   छ0ग0के भवन निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों को संगठित व एकसूत्र में करना एवं सेवा योजकों के साथ उनके आपसी संबंध नियमानाकुल रहे ऐसी व्यवस्था करना है।


2.   संस्था के सदस्यों के लिये नौकरी तथा जीवनयापन की स्थिति सुधारना करना।


3.   उनकी कठिनाइयों का निवारण करने का प्रयत्न करना।


4.   पारिश्रमिक की कमी को रोकना और सम्भवतः अग्रिम रूप में दिलाने की समयानुसार व्यवस्था करना।


5.   सेवायोजक व सेवायुक्त के बीच उत्पन्न विवादों के काल में काम के अवरोध को टालना और सौहार्द्र से आपसी हल निकालने का प्रयत्न करना।


6.   बीमार, बेकारी, निर्बलता, वृद्धावस्था तथा मृत्यु के समय सदस्यों के लिये सहायता प्राप्त करना।


7.   दुर्घटना के समय सदस्यों के लिये क्षतिपूर्ति (विधान के अधीन क्षतिपूर्ति) प्राप्त करना।


8.   नौकरी या उससे सम्बन्धित प्रकरणों से सदस्यों को वैधानिक सहायता देना।


9.   तालाबन्दी या हड़ताल, जो संस्था की स्वीकृति द्वारा की गयी हो, के समय सदस्यों को सहायता दिलाने का प्रयत्न करना।


10. उन श्रम संगठनों से, जिनके उद्ेष्य संस्था के सदृष हों के साथ सहकार्य करना तथा संस्था को उनसे सम्बद्ध करना।


11. व्यावसायिक संघ विधान में निहित नीति के अनुसार श्रमिक वर्ग की सहायता करना।


12. साधारणतः सदस्यों के सामाजिक, आर्थिक, पारस्परिक तथा राजनैतिक जीवन में सुधार करने का प्रयत्न करना, तथा


13. आद्यौगिक् विवादों में श्रमिक का प्रतिनिधित्व करना।


14. मजदूरों एवं उनके आश्रितो के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना तथा मजदूरों को उनके कौशल को बेहतर बनाने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में उनकी मदद करना।


15. श्रमिक सदस्यों को अनुशासन में रहकर कार्य करने का कौशल निर्माण करना तथा यदि कार्य स्थल पर शराब पीकर कार्य करते पाये जाने एवं कार्य के दौरान बाल मजदूरी कराते पाये जाने पर संबंधित विभाग को अवगत कराते हुए उचित कार्यवाही हेतु मांग किया जाना। साथ ही संघ द्वारा उचित अर्थदंड(जुर्माना) एवं संघ की सदस्यता समाप्त किये जाने कि व्यवस्था करना।


16 . संघ के सदस्यों को विभिन्न प्रकार के सुविधा एवं सहायता प्रदान करने के उददेश्य से श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को उनके अधिकारो के प्रति जागरूक कर शिक्षा, न्याय, कानूनी सहायता  दिलाना एवं स्वास्थ्य लाभ के अलावा श्रमिक सदस्यों का श्रम मंडल में पंजीयन एवं सरकार  (शासन) के विभिन्न योजनाओं में आवेदन करने में सहायता प्रदान करना एवं अधिक से अधिक हित लाभ दिलाने का प्रयास करना।


सामान्य निधि का उपयोग


3. व्यावसायिक संघ विधान सन् 1926 की धारा 15 के अनुसार सामान्य निधि का उपयोग निम्नांकित मदों पर ही किया जा सकता है।


(क) संस्था के पदाधिकारियों के वेतन, भत्ता तथा अन्य खर्च के भुगतान हेतु।

(ख) संस्था संचालन का व्यय, जिसमें संस्था के हिसाब की जांच का भी व्यय सम्मिलित है।

(ग) ट्रेड यूनियन के नाते संस्था के अधिकार प्राप्त करने या सुरक्षित रखने हेतु अथवा संस्था के किसी  सदस्य के अपने सेवा-योजक के साथ जो सम्बन्ध हो उनसे निर्माण होने वाले अधिकार प्राप्त करने या सुरक्षित रखने के हेतु किसी ऐसी वैधानिक कार्यवाही को चलाना या उससे बचाव करना कि जिसमें एक पक्ष, संस्था या उसका कोई सदस्य हो।

(घ) संस्था या उसके किसी सदस्य की ओर से किसी औद्योगिक विवाद को चलाना।

(ड) सदस्यों की औद्यौगिक विवादों से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति।

(च) सदस्यों या उनके आश्रितों की मृत्यु, वृद्धावस्था, बीमारी, दुर्घटना और बेकारी की अवस्था में सहायता।

(छ) सदस्यों के जीवन-बीमे या बीमारी, दुर्घटना या बेकारी के बीमे उतारना या ऐसे बीमे के अधीन उन्हे लाना।

(ज) ट्रेड यूनियन के दायित्व को उठाना, सामान्य निधि का उपयोग जिन उद्ेश्यों के लिये निहित है, उनकी पूर्ति के हेतु सर्व साधारण श्रमिकों को कल्याणप्रद किसी कार्य में अनुदान देना, परन्तु किसी भी आर्थिक वर्ष में किसी भी समय इस मद का व्यय उस समय तक उस वर्ष में प्राप्त सामान्य निधि की आमदनी व वर्ष के प्रारम्भ में सामान्य निधि के खाते जमा कुल रकम के एक-चौथाई से अधिक नहीं होगा।

(झ) सदस्यों या उनके आश्रितों के लिये शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक लाभों की व्यवस्था, जिसमें मृत सदस्यों के लिये मृत-क्रिया के खर्च का भी समावेश होगा।

(´) मुख्यतः सेवायोजक तथा सेवायुक्त के अपने प्रश्नों की चर्चा के हेतु प्रकाशित नियतकालिक-पत्र चालू रखना।

(ट) शासन द्वारा राजपत्र में विज्ञप्ति किसी अन्य उद्दिष्ट के हेतु, विज्ञप्ति में अन्तभूत के अनुसार करना।

(ठ)    कार्यकारणी सदस्य (मजदूर सेवक मित्र) को श्रमिक हित मे बेहतर कार्य प्रदर्शन करने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान करना।

सदस्यता पुस्तिका

4. संस्था में एक सदस्यों की पुस्तिका रखी जावेगी, जिसमें सदस्यों के नाम (पिता के नाम सहित,) आयु, निवास स्थान, काम करने का स्थान (पाली, खाता या विभाग) जमा चन्दा रसीद क्रमांक आदि का उल्लेख होगा।

5. उपर्युक्त पुस्तिका, संस्था के प्रधान कार्यालय में छुट्टी को छोड़कर संघ के कार्यकाल में किसी भी अधिकारी या सदस्य के निरीक्षण हेतु रखी जावेगी।

साधारण सदस्यता

6. छ0ग0 के भवन निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों को जिसे संस्था नियम व उप-नियम मान्य है, सदस्यता शुल्क देकर सघं का सदस्य बनने की पात्रता रखता हो।

सम्माननीय सदस्यों की सदस्यता

7. जो व्यक्ति साधारण सदस्य होने की पात्रता नहीं रखता हो, उसे संस्था में सम्माननीय सदस्य की स्थिति में प्रवेश दिया जा सकता है और वह सम्माननीय सदस्यता के काल में प्रबन्धकारिणी समिति में भी चुना या लिया जा सकता है। किन्तु, ऐसे सदस्यों की संख्या व्यावसायिक संघ अधिनियम की धारा 22 के अनुसार आधे से कभी भी अधिक नहीं होगी।

सद्स्यता शुल्क

8. संस्था की सदस्यता प्राप्ति के लिए रू. 10/- प्रवेश शुल्क रहेगा। संस्था का सदस्यता शुल्क मासिक रू. 20/- प्रति सदस्य होगा। सदस्यता शुल्क मासिक/त्रैमासिक/छःमाही अथवा वार्षिक लिया जावेगा।


सदस्यों को नियमों में सुझाये गये लाभ प्राप्त करने का अधिकार

9. (अ) कोई भी सदस्य संस्था द्वारा सदस्यों को दिये गये लाभ को पाने का अधिकारी कम से कम पांच मास तक संस्था का सदस्य रहने और पूर्ण चन्दा चुकाने पर हो सकेगा।

(ब) वह सदस्य जिस पर संस्था का बकाया चन्दा अथवा किसी प्रकार लेना शेष है, जब तक कि उसका भुगतान पूरा नहीं कर देता, और दो मास की अवधि नहीं बीत जाती, संस्था द्वारा संचालित किसी भी लाभ को पाने का भागी नहीं होगा।

(स) यदि संस्था के सदस्य प्रबन्धकारिणी समिति का अनुमोदन एंव स्वीकृति लिये बिना किसी हड़ताल पर जावेंगे तो वे संस्था द्वारा संचालित किसी लाभ को पाने के भागी नहीं होंगे।


अर्थ-दण्ड एंव उसकी वसूली

10. किसी भी सदस्य की सदस्यता संस्थ्का का सदस्यता शुल्क (मासिक चन्दा) न देने की स्थिति में, प्रबन्धकारिणी समिति की अनुमति से पांच मास एंव उसके अभाव में तीन मास मे, समाप्त हो जावेगी किन्तु वह शेष चन्दा एंव दण्ड के बतौर पुनः प्रवेश-शुल्क देने पर उसकी सदस्यता निरंतरित (जारी) की जा सकेगी।


साधारण सभा

11. संस्था के सम्पूर्ण सदस्यों की वार्षिक साधारण सभा जनवरी अथवा फरवरी मास में बुलाई जावेगी जिसमें निम्नलिखित कार्यवाही होगीः-

(अ) संस्था द्वारा किये गये कार्य का प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तथा जांच किये गये हिसाब को मान्य करना।

(ब) तीन वर्ष के लिये पदाधिकारी तथा प्रबन्धकारिणी के सदस्य चुनना, एंव

(स) अन्य कार्यवाही जो सभापति के अनुमोदन से हो, सभा में प्रस्तुत करना।

12. अध्यक्ष संस्था के सदस्यों की साधारण सभा को जब वह आवश्यक समझे, तब बुला सकता है और उसी भांति अध्यक्षता को संस्था की साधारण सभा बीस प्रतिशत सदस्यों के लिखित मांग करने पर प्रार्थना-पत्र प्राप्ति से बीस दिन की अवधि में बुलाना होगा।

13. सदस्यों की साधारण सभा की सूचना कम से कम पन्द्रह दिवस पूर्व देना होगा।

14. साधारण सभा के लिये सम्पूर्ण सदस्य संख्या के एक-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक (कोरम) मानी जावेगी। आवश्यक उपस्थिति के अभाव के कारण स्थगित की गई सभा के लिये दूसरी बैठक में उपस्थिति का आवश्यक प्रतिबन्ध नहीं रहेगा।


संघ के अधिकारीगण व उनकी नियुक्ति


15. केन्द्रीय बॉडी-संस्था के पदाधिकारियों में (1) प्रदेश अध्यक्ष  01, (2) अधिकाधिक 3 -प्रदेश उपाध्यक्ष  (3) प्रदेश महामंत्री 01, (4) प्रदेश मंत्री 05, (5) एक प्रदेश कोषाध्यक्ष (6) प्रदेश कार्यकारणी सदस्य होगा। ये सभी संस्था के साधारण सभा में चुने जावेंगे। दुबारा चुनाव में ग्राह्य होंगे। प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री ही केवल संस्था के बाहर के हो सकते हैं।


16. संघ अपने कार्य को सुगमता पूर्वक करने हेतु संभाग, जिला एवं ब्लॉक स्तर में निम्नानुसार केन्द्रीय बॉडी के बहुमत के आधार पर गठित कर सकेगाः- प्रत्येक संभाग, जिला एवं ब्लॉक में एक-एक अध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, उपाध्यक्ष, कोशाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत स्तर पर एक-एक कार्यकारणी सदस्य के रूप में मजदूर सेवक मित्र  (MSM)  नियुक्त रहेगें। 


* कार्यकाल - अधिक्तम दो वर्ष 

* संघ का केवल एक ही बैंक खाता होगा जिसमें राशि का वितरण -50 प्रतिशत संभाग, जिला, ब्लॉक में रखेगेंं व 50 प्रतिशत राशि केन्द्रीय बॉडी के पास रहेगा।

* संभाग, जिला व ब्लॉक वाले अपने लेखा जोखा का आडिट करवा कर केन्द्रीय बॉडी के पास प्रस्तुत करेगें जिसके आधार पर केन्द्रीय बॉडी पंजीयक कार्यालय को नियमानुसार प्रस्तुत करेगा।

* समस्त शिकायतों का निपटारा विधानानुसार केन्द्रीय बॉडी करेगा।


संस्था का प्रबन्ध

17. केन्द्रीय बॉडी के प्रबन्धकारिणी समितिः व्यावसायिक संघ अधिनियम, सन् 1926 की धारा 21 को सम्मुख रखते हुये संस्था का आर्थिक तथा सम्पूर्ण अन्य कार्यभार प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा चलाया जावेगा, जिसमें साधारण वार्षिक सभा में चुने हुये सदस्य एंव अधिकारीगण होंगें। प्रबन्धकारिणी के कुल सदस्य की संख्या 12 होगी।


प्रबंधकारिणी की सभाएं

18. प्रबन्धकारिणी समिति प्रत्येक तीन माह में कम से कम एक बार किसी भी निश्चित दिन और स्थान, जो कि प्रदेश महामंत्री या प्रदेश अध्यक्ष द्वारा तय होगा, बैठक रखेगी।

19. प्रबन्धकारिणी समिति के कुल सदस्यों की एक-तिहाई उपस्थिति कथित बैठक के लिये आवश्यक (कोरम) मानी जावेगी, स्थगित की गई बैठक के लिये आवश्यक उपस्थिति (कोरम) का प्रतिबन्ध नहीं होगा।

20. प्रबन्धकारिणी समिति की बैठक की सूचना कम से कम तीन दिन पूर्व देना आवश्यक है।


पदाधिकारियों के कर्त्तव्य

21. प्रदेश अध्यक्ष एंव प्रदेश उपाध्यक्ष : अध्यक्ष संस्था की तथा प्रबन्धकारिणी समिति की समस्त सभाओं को सभापतित्व करेगा। सभांओं में व्यवस्था बनाये रखना, सभा के सम्पूर्ण कार्यवाही लेखा (मिनिट्स) पर हस्ताक्षर करना और समान मत प्रदर्शन होने पर ही अपना मत देना अध्यक्ष का कर्तव्य है। आवश्यकता के समय अध्यक्ष को यह अधिकार होगा कि वह कभी भी संस्था या प्रबन्धकारिणी समिति की विशेष सभा बुलाये। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्षों में से कोई भी एक सभा में अध्यक्ष का कार्य संचालन करेगा।


22. प्रदेश महामंत्रीः महामंत्रीसंस्था तथा प्रबंधकारिणी समिति की समस्त सभाओं की कार्यवाही का लेखा (मिनिट्स) लिखेगा, संपूर्ण पत्र व्यवहार करेगा, सभाओं को नियंत्रित करेगा, सम्पूर्ण हिसाब रखेगा, सदस्यों को साधारण सभा की सूचना एजेण्डे सहित व्यक्तिगत हस्ताक्षर प्राप्त कर या नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर देगा। संस्था के कारोबार की पूर्णतः देख रेख और आय-व्यय की रसीदों सहित सही जॉंच रखेगा। वह वार्षिक आय-व्यय का लेखा बनावेगा। जिसमें आय-व्यय का प्रत्येक अंक सही दशा में दिखाया गया हो। वह व्यावसायिक संघ अधिनियम सन् 1926 के अन्तर्गत रजिस्ट्रार आफ ट्रेड यूनियन्स छ0ग0 को भेजे जाने वाले वार्षिक आय-व्यय पत्रक तथा अन्य सूचनादि भेजने के लिये समय-समय पर उत्तरदायी होगा। यदि इस कार्य संचालन हेतु आवश्यक हो तो  महामंत्री को यह अधिकार होगा। कि वह अध्यक्ष के परामर्श से तथा प्रबन्धकारिणी समिति के अनुमोदन से कोई भी सहायक लिपिक (क्लर्क) लेखन संबंधी कार्य हेतु नियुक्त कर लें। ऐसे सम्पूर्ण  महामंत्री के नियन्त्रण में कार्य सम्पादन करेंगे।  महामंत्री  संस्था की ओर से मांग पत्र/परिवर्तन सूचना पत्र देगा। समझौता कार्यवाही में भाग लेगा। समझौता संपन्न होने पर समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। वह शासकीय/अर्धशासकीय/अशासकीय विभागों में संस्था का प्रतिनिधित्व करेगा। आवश्यकता पड़ने पर प्रबंधकारिणी समिति की अनुमति से सदस्य/सदस्यों के प्रकरण में न्यायालयीन कार्यवाही करेगा।


23. प्रेदश मन्त्रीगण : अन्य मंत्रीगण  महामंत्री को सामान्य रूप से उसके कार्य में सहायता देंगे। उनमें से कोई एक  महामंत्री की अनुपस्थिति में उनका कार्यभार सम्भालेगा।


24. प्रदेश कोषाध्यक्ष : कोषाध्यक्ष संस्था में समय-समय पर प्राप्त होने वाले धन को बैंक या अन्यत्र कहीं सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता के समय संस्था को देने के लिये उत्तरदायी होगा। वह प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा स्वीकृत किये गये सम्पूर्ण व्यय का भुगतान करेगा। प्रदेश अध्यक्ष अथवा प्रदेश महामंत्री के हस्ताक्षर लिये बिना प्रदेश कोषाध्यक्ष को बैंक से पैसा निकालने का अधिकार नहीं होगा।


रिक्त स्थानों की पूर्ति एवं पदच्युति तथा सदस्यता समाप्ति

25. यदि प्रबन्धकारिणी के कार्यकर्ता अथवा संस्था के पदाधिकारी का कोई पद, त्याग-पत्र, तबादला या मृत्यु आदि के कारण रिक्त हुआ हो, तो वह प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा निर्वाचन द्वारा भरा जावेगा।


26. संस्था का कोई भी साधारण सदस्य, कार्यकर्ता, अधिकारी या प्रबन्धक या प्रबन्धकारिणी समिति का सदस्य संस्था को धोका देने या उसके हित के विरूद्ध कार्य करने के अपराध में साधरण सभा से तीन-चौथाई  बहुमत से निकाला जा सकता है, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐस अधिकारी या सदस्य को उसके बर्ताव के विषय में स्पष्टीकरण देने का पूर्ण अवसर दिया जाना चाहिये।


विधान में परिवर्तन

27. विधान में कोई भी संशोधन परिवर्तन घट-बढ़ किसी भी समय साधारण सभा में संस्था में प्रविष्ट कुल सदस्यों के दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत से किया जा सकता है जबकि किये जाने वाले परिवर्तन की सूचना सदस्यों को कम से कम सात दिन पूर्व दी गयी हो। व्यसायिक संघ अधिनियम, 1926 के अन्तर्गत रजिस्ट्रार आफ ट्रेड यूनियन महोदय द्वारा समय-समय पर विधान में संशोधन या परिवर्तन सुझाये जावेंगे उनके अनुसार विधान में परिवर्तन अविलम्ब किया जावेगा। 


कोष सुरक्षित रखने की व्यवस्था

28. सदस्यों से प्राप्त चन्दा, दान आदि से प्राप्त कुल निधि का संस्था की सामान्य निधि में समावेश होगा। प्रबन्धकारिणी समिति द्वारा अनुमोदित बैंक या बैंकों में संस्था के नाम से यह धनराशि जमा की जावेगी जिसका व्यवहार प्रदेश कोषाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष या प्रदेश महामंत्री या नामित में से कोई दो व्यक्ति करेंगे। संघ का केवल एक ही बैंक खाता होगा। प्रदेश महामंत्री अथवा प्रदेश कोषाध्यक्ष अपने पास हाथ खर्च के लिये 50000 रूपये से अधिक निधि नहीं रख सकेंगे।  

वार्षिक हिसाब परीक्षण

29. संस्था, हिसाब का वार्षिक परिक्षण योग्य आडिटरों द्वारा कराने के लिये जिन्हें प्रबन्धकारिणी समिति ने व्यावसायिक संघ अधिनियम के अधीन बने छ0ग0 ट्रेड यूनियन रेग्युलेशन्स, सन् 1961 के रेग्युलेशन्स क्रमांक 18 के अनुसार नियुक्त किया हो, व्यवस्था करेगी। हिसाब के लिये संस्था का आर्थिक वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक का रहेगा व व्यावसायिक संघ अधिनियम, सन् 1926 की धारा 28 के अंतर्गत वार्षिक विवरण-पत्र निर्धारित फार्म में आय-व्यय परीक्षकों के हस्ताक्षरयुक्त पंजीयक व्यावसायिक संघ की ओर प्रतिवर्ष 31 मार्च के पूर्व भेजा जावेगा। 

हिसाब की पुस्तकों का निरीक्षण

30. संस्था के हिसाब की पुस्तकें कोई भी सदस्य या पदाधिकारी के निरीक्षण हेतु प्रधान कार्यालय में छुट्टियों के दिन छोड़कर कार्यालय के कार्यकाल में उपलब्ध रहेगी। 


संस्था का विघटन


31. संस्था का विघटन उपस्थित सदस्यों के तीन-चौथाई बहुमत से इसी हेतु बुलायी गयी साधारण सभा द्वारा किया जा सकता है जबकि ऐसी सभा में कुल मतदान उस समय संस्था में प्रविष्ट सम्पूर्ण सदस्य संख्या के दो-तिहाई से कम न हो। सम्पूर्ण दायित्व का चुकारा करने के पश्चात् शेष निधि का निराकरण सभा विघटन के निर्णयानुसार किया जावेगा।

32. संघ को अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिये जब तक की संराधन एवं पंच निर्णय के मार्ग उपलब्ध है युनियन हड़ताल के लिये मंजूरी नहीं देगी। वह उस समय तक हड़ताल नहीं करेगी जब तक कि हड़ताल के लिये मतदान न लिया गया हो और अधिकांश सदस्यों ने हड़ताल के पक्ष में मत न दिया हो।